बहस पर शिक्षा!

बहस पर शिक्षा!

इंस्पेक्टर से एक घंटे से झगड़े जा रहे थे नौ हजार डॉलर का एक सामान बहस का कारण था मिस्टर पारसंस का कहना था कि वे नौ हजार डॉलर बुरा कर्ज थे और चूंकि यह कभी वापस नहीं आ सकते, इसलिए इन पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। "बुरा कर्ज, मेरी जूती! इंस्पेक्टर ने जवाब दिया। "इस पर टैक्स लगना चाहिए। “यह इंस्पेक्टर बदतमीज, अड़ियल और जिद्दी था। मिस्टर पारसंस ने यह कहानी हमारी क्लास में बताई-"न तर्क की गुंजाइश थी और न तथ्यों की जितनी ज्यादा हम बहस करते, वह उतना ही जिद्दी होता गया, इसलिए मैंने बहस करनी छोड़ी, विषय को बदल दिया और उसकी तारीफ शुरु कर दी। "मैंने कहा, "जितने बड़े-बड़े निर्णय आप लेते हैं, उनकी तुलना में यह तो काफी छोटा मामला है। मैंने भी टैक्स की पढ़ाई की है, लेकिन मेरी जानकारी तो सिर्फ किताबों से आई है, लेकिन आपकी जानकारी तो अनुभव से आई होगी काश! मेरे पास आपके जैसी नौकरी होती, तब मैं बहुत कुछ सीखा पाता। मैंने एक-एक शब्द सच्चाई से कहा अच्छा इंस्पेक्टर अपनी चेयर पर सीधा हुआ, पीछे झुका और अपने काम के बारे में घंटों बात करता रहा और उसने धोखाधड़ी के मामलों के बारे में बताया, जो उसने पकड़े हैं। उसका लहजा दोस्ताना होता गया, फिर वह अपने बच्चों के बारे में बताने लगा। जाते समय उसने कहा कि वह मेरी समस्या पर विचार करेगा और कुछ दिनों में अपना निर्णय सुनाएगा।" 'उसने तीन दिन बाद मेरे ऑफिस फोन किया और कहा कि मेरा टैक्स रिटर्न वैसे ही लेगा जैसे मैंने भेजा है। वह टैक्स इंस्पेक्टर इंसानी स्वभाव की सबसे ज्यादा पाई जाने वाली कमी दिखा रहा था!

वह महत्त्वपूर्ण होने का एहसास चाहता था और जब तक मिस्टर पारसंस ने उससे बहस की, उसे यह एहसास अपनी ताकत दिखाकर मिला, पर जैसे ही उसके महत्त्व को स्वीकार कर लिया गया और उसके अहंकार की तृप्ति हो गई, वह एक अच्छा और उदार इंसान बन गया। बट ने कहा था-"नफरत कभी नफरत से नहीं, प्यार से खत्म होती है और आपसी गलतफहमी कभी बहस से नहीं, बल्कि समझदारी, थोड़ा झुकने और दसरे का नजरिया समझने की सहानुभूति भरी इच्छा से खत्म होती है!

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