बहस करने पर शिक्षा!

बहस करने पर शिक्षा!

फिर उसे रुक जाना पड़ता है वह सारी दोपहर यह नहीं कह सकता कि सबसे अच्छा है जब मैं उसकी बात स्वीकार कर रहा हूं। तब हम व्हज के टॉपिक से हट जाते हैं और व्हाइट ट्रक की खासियत के बारे में बातें कर लगते हैं। "एक समय ऐसा था जब उसके द्वारा कही गई पहली बात मुझे लाल-पीला कर देती थी। मैं व्हूज-इट के खिलाफ बातें करने लगता और मैं जितनी बहस करता, वह उतना ही व्हूज-इट ट्रक के पक्ष में चला जाता और मैं जितनी बहस करता, अपने प्रतियोगी के ट्रक उतने ही ज्यादा बेच डालता।" "अब जब मैं अतीत की ओर देखता हूं तो समझ में नहीं आता कि मुझसे कोई सामान बिक भी कैसे सकता था। मैंने जिंदगी के बेहतरीन पल लडने और बहस करने में बिताए। अब मैं चुप रहता हूं। इससे मुझे ही फायदा होता है। जैसा कि समझदार बेन फ्रैंकलिन कहा करते थे- अगर आप बहस करते हैं या विरोध करते हैं तो आप कभी-कभी जीत सकते हैं, पर यह जीत खोखली होगी, क्योंकि आपने कभी सामने वाले का समर्थन नहीं जीता। तो खुद ही पता लगाइए!

आप क्या चाहेंगे, एक बौद्धिक और नाटकीय जीत या फिर सामने वाले का समर्थन? आप दोनों एक साथ नहीं पा सकते बोस्टन ट्रांस्क्रिप्ट ने एक बार यह कविता छापी थी- यहां लेटा है विलियम जे. का शरीर, खद को हमेशा सही कहता रहा यह शरवीर वह हमेशा सही था, जब तक रहा वह जिंदा. अब वह गलत है जैसे पड़ा है यह मुर्दा! हो सकता है जैसे आप तर्क देते हैं, आप बिलकुल सही हों, लेकिन जहां दसरे इंसान की सोच बदलने की बात हो, आप वैसे ही बेकार साबित होंगे मानो आप गलत हों। फ्रेडरिक एस. पारसंस, इन्कम टैक्स कंसल्टेंट, एक बार एक सरकारी और बेरोजगार आदमी से बहस कर बैठे और उनका सारा माल लूटा गया और अंतिम में अपने घर को आ गये!

Post a Comment

0 Comments