सम्मान करने पर शिक्षा!

सम्मान करने पर शिक्षा

जब मैं प्लांट पर पहुंचा, मुझे पर्चेजिंग एजेंट और लंबर इंस्पेक्टर और बहस करने के अंदाज में मिले, हम उस कार के पास गए जिससे उतर रहा था और मैंने उनसे निवेदन किया कि वे सामान को वैसे ही दें, ताकि मैं स्थिति समझ सकूँ। मैंने इंस्पेक्टर से कहा कि वह रिजैक्ट वार समान को अलग हटाए, जैसे वह करता आ रहा था और अच्छे टुकड़ों को अलग जगह डाले। उसको थोड़ी देर देखने के बाद मैं समझा कि वह कुछ ज्यादा ही कड़ाई से नियमों का पालन कर रहा था और नियमों को गलत ढंग से अपना रहा था। एक लंबर व्हाइट पाइन था और मैं जानता था कि इंस्पेक्टर को हार्ड वुड की जानकारी थी, पर वह व्हाइट पाइन के बारे में उतना सक्षम नहीं था। व्हाइट पाइन के बारे में मैं विशेषज्ञ था, पर क्या मैंने उसके निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाया? बिलकुल भी नहीं। मैं देखता रहा और धीरे-धीरे पूछने लगा कि कुछ टुकड़े संतोषजनक क्यों नहीं थे? मैंने एक भी बार ऐसा इशारा नहीं किया कि इंस्पेक्टर गलत था। मैंने इस बात पर जोर दिया कि मैं सिर्फ इसलिए ये चीजें जानना चाह रहा था ताकि उसकी फर्म को वह सामान दे सकूँ, जो वह चाहता है।" "एक दोस्ताना तरीके से सवाल पूछने और उसे यह बताने से कि वह असंतोषजनक टुकड़ों को निकालकर अच्छा कर रहा था, उसका स्वभाव थोड़ा बदला और हम दोनों के बीच कड़वापन थोड़ा कम हो गया। सावधानी से कही गई मेरी एक बात ने उसके दिमाग में यह संभावना पैदा की कि उसको दिया जाने वाला लंबर अच्छी क्वालिटी का था और उसके द्वारा मांगी गई क्वालिटी ज्यादा दामों पर ही मिल सकती थी!

मैंने इस बात का ख्याल रखा कि उसे यह न लगे कि मैं मामले को बिगाड़ रहा हूं।" धीर-धीरे उसका नजरिया बदल गया उसने अंत में स्वीकार किया कि उसे व्हाइट पाइन में ज्यादा अनुभव नहीं था और हर टुकड़े के कार से निकालने पर मझसे सवाल करने लगा और मैं बताने लगा कि कैसे हर मोट के हिसाब से था, पर साथ ही मैने यह कहा कि अगर उसे यह अयोग्य लगे तो उसे यह नहीं लेना चाहिए। अंत में उसने देखा किमान क्योंकि उसने जरूरत के हिसाब से ग्रेड नहीं बताया था। "अंतिम परिणाम यह रहा कि उसने पूरे कारलोड को फिर से परखा और मेरे जाने के बाद, उसने पूरा सामान स्वीकार किया और मुझे पूरा दाम दिया!

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