इंसान की क्वालिटी पर शिक्षा!

इंसान की क्वालिटी पर शिक्षा!

एक बार मैंने घर में पर्दे लगवाने के लिए एक इंटीरियर डेकोरेटरी ली जब बिल आया, तो मैं चकरा गया कुछ दिनों बाद, मेरे घर एक दोस्त आई और उसने पर्दे देखे जब पर्यों की कीमत बताई तो उसने जीत के स्वर में कहा-"क्या? बहुत बेकार मुझे लगता है उसने तुम्हें ठग लिया।" सही? हां, उसने सही कहा था, पर बहुत कम लोग वह सच सुनना चाहते हैं जो उनके निर्णयों पर सवाल उठाते हैं। इसलिए, इंसान होने के नाते, मैंने अपना बचाव किया। मैंने कहा कि सबसे अच्छा सामान ही आखिरकार सस्ता पड़ता है। और मोलभाव के दाम पर कोई इंसान क्वालिटी और ऊंचा टेस्ट नहीं पा सकता। अगले दिन एक दूसरा दोस्त आया, उसने पर्यों की तारीफ की और उत्साह से पूछा कि क्या वह ऐसे पर्दे अपने घर में लगा सकता है? मेरी प्रतिक्रिया बिलकुल अलग थी। "सच कहूं तो," मैंने कहा-"यह मेरी जेब से भी बाहर हैं। मैंने बहुत ज्यादा पैसे दिए। मुझे दुख है कि मैंने उन्हें खरीदा।" जब हम गलत हैं तो हम उन्हें खुद स्वीकार कर सकते हैं। अगर हमारे साथ प्यार से पेश आ जाए तो हम यह दूसरों के सामने भी स्वीकार कर सकते हैं और खुद के साहसी और खुले दिमाग के होने पर गर्व भी कर सकते हैं, पर हम ऐसा नहीं करते, अगर कोई हमारे गले से तथ्य घोंटने की कोशिश कर रहा हो। होरेस ग्रीली, सिविल वार के समय अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध एडिटर, लिंकन की नीतियों से सहमति नहीं रखते थे। उन्हें लगा कि बहस, मजाक और निंदा की कैम्पेन चलाकर वे लिंकन को अपनी सोच में ढाल सकते थे!

वे महीनों और सालों तक अपनी कैम्पेन चलाते रहे। दरअसल जिस रात लिंकन पर बूथ ने गोली चलाई, उसी रात उन्होंने लिंकन पर एक क्रूर, कड़वा, व्यंग्य से भरा और निजी हमला किया था। पर क्या इस कड़वेपन ने लिंकन को ग्रीली से सहमति रखने की तरफ सफलता दिलाई? बिलकुल नहीं। मजाक उड़ाने और निंदा करने से यह कभी हासिल नहीं होता। अगर आप लोगों से बर्ताव करने, अपना प्रबंधन करने और अपना व्यक्ति निखारने के लिए कुछ अच्छी सलाहें चाहते हैं, तो बेंजामिन फ्रैंकलिन की आत्मकथा पढ़ें। यह अमेरिकी साहित्य का क्लासिक है और अब तक की एक सबसे अच्छी जीवन की कहानी है!

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