निरक्षण करने पर शिक्षा!

निरक्षण करने पर शिक्षा!

अगर कोई इंसान कोई ऐसी बात कहता है, जो आपकी नजरों में गलत है हां, यह जानते हुए कि वह गलत है क्या कुछ इस तरह से कहना सही नहीं होगा-"अच्छा, अब देखो, मैंने कुछ दूसरा सोचा था, पर शायद मैं गलत हो सकता हूं। अक्सर मैं गलत होता हूं और अगर मैं गलत हूं तो मैं इसे सही करना चाहता हूं। चलो, तथ्यों की जांच करते हैं।" इस तरह की बातों में जादू है, जादू जैसा प्रभाव है-"मैं गलत हो सकता है। मैं अक्सर गलत होता हूं। तथ्यों की जांच कर लेते हैं।" न धरती पर और न स्वर्ग में कोई भी इंसान इस तरह की बात पर असहमति जाहिर करेगा, “मैं गलत हो सकता है। तथ्यों की जांच कर लेते हैं।" मेरी एक क्लास में एक सदस्य था, जो ग्राहकों से बात करते समय यह तरीका अपनाता था। वह मोन्टाना के बिलिंग्स में एक डोज डीलर था और उसका नाम था हरोल्ड रेंके। उसने बताया कि ऑटोमोबाइल बिजनेस के दबाव के कारण वह ग्राहकों की शिकायत सुनते समय अक्सर उबल पड़ता था। इससे उसे बदले में गुस्से का सामना, बिजनेस का नुकसान और झगड़े का सामना करना पड़ता था। उसने अपनी क्लास को बताया-"यह समझने के बाद कि इस कारण से मैं तरक्की नहीं कर पा रहा था, मैंने एक नया तरीका अपनाया। मैं कुछ तरह से कहने लगा-"हमारी डीलरशिप ने इतनी गलतियां की हैं कि मुझे शर्मिंदगी होती है। हमने आपके मामले में भी गलती की हो। इस बारे में बताइए।" 3 "इस तरीके से मामला हल्का हो जाता और जब तक ग्राहक अपना गुस्सा निकालता तब तक वह मामला सुलझाने के लिए ज्यादा झुकने को तैयार हो जाता। दरअसल, कई ग्राहकों ने मुझे ऐसा व्यवहार करने के लिए शुक्रिया अदा किया है!

उनमें से दो लोग तो अपने दोस्त को भी कारें खरीदने के लिए लेकर आए इस प्रतियोगी माहौल में हमें इस तरह के ग्राहक और ज्यादा चाहिए और मझे लगता है कि ग्राहकों के नजरिए के प्रति सम्मान दिखाने से और उनसे समझदारी से बर्ताव करने से हम प्रतियोगिता में आगे रहेंगे।" अगर आप स्वीकार करते हैं कि आपसे गलती हो सकती है तो आप कभी मुसीबत में नहीं पड़ेंगे। इससे सारी बहस रुक जाएगी और आपके विपक्षी को भी न्यायपूर्ण, खुले दिमाग वाला और सुलझे होने की प्रेरणा मिलेगी। इससे वह स्वीकार कर पाएगा कि वह भी गलत हो सकता है!

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