शांति स्वभाव पर शिक्षा!

शांति स्वभाव पर शिक्षा!

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद लंदन में एक रात मैंने एक बहुत जरूरी बात सीखी मैं उस समय सर रॉस स्मिथ के लिए मैनेजर था। युद्ध के समय सर रॉस स्मिथ फिलिस्तीन में ऑस्ट्रेलिया के कमांडर थे और युद्ध के खत्म होते ही उन्होंने तीस दिनों में आधी दुनिया में उड़कर सबको चकित कर दिया था। इससे पहले ऐसी कोई चीज नहीं की गई थी। इसने कमाल की सनसनी फैला दी थी ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने उन्हें पचास हजार डॉलर का इनाम दिया। इंग्लैंड के किंग ने उन्हें नाइट बना दिया और कुछ समय तक, वे यूनियन जैक के नीचे सबसे ज्यादा खबरों में रहने वाले इंसान थे। मैंने एक बार सर रॉस के सम्मान में दिए जाने वाले प्रीतिभोज में हिस्सा लिया और भोजन के समय, मेरे पास बैठे एक इंसान ने एक हंसाने वाली कहानी सुनाई, जो इस कहावत पर आधारित थी-"एक दैवीय शक्ति है, जो हमारी जिंदगी को स्वरूप देती है, भले ही हम इसे कितना भी बदलने की कोशिश करें।" कहानी सुनाने वाले ने बताया कि यह पंक्ति बाइबिल से है। वह गलत था। मैं जानता था, अच्छी तरह से जानता था। इस बारे में मुझे थोड़ा भी संदेह नहीं था। इसलिए मैंने थोड़ा महत्त्व पाने के लिए और अपनी जानकारी दिखाने के लिए खुद को उसे सुधारने वाला एक अनचाहा सदस्य बना लिया, पर वह अपनी बात पर अड़ा जब थियोडोर रुजवेल्ट व्हाइट हाउस में थे, तो उन्होंने स्वीकारा था कि अगर वे सिर्फ 75 प्रतिशत मामलों में सही रहें, तो अपनी आशाओं पर सबसे ज्यादा खरे उतरेंगे। अगर बीसवीं शताब्दी के एक सबसे ज्यादा सफल इंसान की यह सबसे ऊंची रेटिंग की अपेक्षा थी, तो आपका और मेरा क्या हाल होगा? अगर आप सिर्फ 55 प्रतिशत मामलों में सही हों, तो आप वाल स्ट्रीट जाकर हर रोज एक मिलियन डॉलर कमा सकते हैं और अगर आप खुद 55 प्रतिशत समय भी सही नहीं होते, तो आपको दूसरों को गलत कहने का क्या अधिकार है!

आप लोगों को अपनी नजर से, बोलने के अंदाज से उतनी ही जोर से गलत बता सकते हैं जितना अपने शब्दों से और अगर आपने उन्हें गलत बताया, तो क्या आप उनसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे आपसे सहमति रखें? कभी नहीं! क्योंकि आपने उनकी बुद्धि, उनके निर्णय, अभिमान और आत्मसम्मान पर गहरा प्रहार किया है। इस कारण से वे भी आपको कड़ा जवाब देंगे। इस प्रकार कभी भी वे अपनी सोच बदलने पर मजबूर नहीं होंगे। आप उन पर प्लेटो और इमेनुएल कांत के तर्कों की बौछार कर सकते हैं, पर आप कभी भी उनका नजरिया नहीं बदल पाएंगे, क्योंकि आपने उनकी भावनाएं आहत की हैं!

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